ट्रांसफार्मर क्या है? || Transformer principal || how to work Transformer !! ये जान लिया तो कभी ट्रांसफार्मर फैल नही होगा

परिचय (लेखक श्री राजेश अलोने -इलेक्ट्रिकल इंजिनियर )

Transformer एक STATIC DEVICE है| मतलब इसका कोई पार्ट मोमेंट नहीं करता है| इसके द्वारा बिना फ्रीक्वेंसी में CHANGE किये सर्किट के वोल्टेज को कम या ज्यादा किया जाता है|
ट्रांसफार्मर की रेटिंग KVA में क्यों होती है?
इसको बहुत अच्छे से समझाया है जरुर पड़े|

power transformer


इसमें दो प्रकार की COIL होती है| जिस COIL में सप्लाई इनपुट की जाती है उसे primary winding कहते हैं| और जिस COIL से सप्लाई आउटपुट ली जाती है उसे secondary winding कहा जाता है|


ट्रांसफार्मर का आविष्कार


इसका का आविष्कार माइकल फैराडे ने 1831 में ब्रिटेन में किया था|


ट्रांसफार्मर का कार्य सिध्दांत

इसमें में एक लेमिनेटेड कोर और दो वाइंडिंग होती है| वाइंडिंग एक अच्छे सुचालक जैसे कॉपर या अल्युमिनियम धातु के तार की बनी होती है|


transformers इलेक्ट्रिसिटी generate नहीं करता है| यह सिर्फ इलेक्ट्रो मोटिवे फ़ोर्स का इस्तेमाल करके वोल्टेज को कम या जयादा करता है|


जब ट्रांसफार्मर के प्राइमरी वाइंडिंग में AC CURRENT दी जाती है तो उसके आसपास इलेक्ट्रिक मेग्नेटिक फील्ड उल्पन्न होता है| इस मेग्नेटिक फील्ड के कारण सेकेंडरी वाइण्डिंग में electrive motive force (EMF) विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है| सेकंड्री वाइंडिंग भी उसी कोर पर लगी होने के कारण ELECTRIC MEGNETIC INDUCTION के कारण उसमे AC CURRENT बहाने लगता है|
ट्रांसफार्मर में input और output frequency समान ही रहती है लेकिन Voltage और current मान बदल जाता है।
यदि ट्रांसफार्मर Step-up है तो वोल्टेज बढ जायेगा और करंट कम हो जायेगा| और यदि ट्रांसफार्मर Step Down है तो वोल्टेज कम कम हो जायेगा तथा करंट बढ जाता है।

SECONDARY WINDING में INDUCTION के कारन उत्पन्न करंट मेग्नेटिक फील्ड के समानुपाती होता है|

Primery winding में जिस frequency की करंट देंगे| secondary winding में भी वही frequency आएगी|

transformer machanism



ट्रांसफार्मर के प्रकार

Phase की संख्या के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है
1) सिंगल फेज ट्रांसफार्मर
2) Three phase ट्रांसफार्मर
Output के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है|
Step up transformer
Step down transformer
कोर (Core) के आधार पर ट्रांसफार्मर तीन प्रकार के होते है

शैल
क्रोड
बैरी प्रकार का

इसके अलावा ट्रांसफार्मर पावर ट्रांसफार्मर (PTR) तथा डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (DTR) भी होते है।
क्या ट्रांसफार्मर DC सप्लाई पर भी काम कर सकता है?
ऊपर हमने जो भी ट्रांसफार्मर के वर्किंग सिद्धांत पड़े वे सब AC current वाले है|
तो आपके मन में सवाल तो आया ही होगा की क्या ट्रांसफार्मर DC supply पर work करता है? इसका जवाब है कि transformer सिर्फ-और-सिर्फ AC पर ही काम कर सकता है। इसका इनपुट भी AC होगा और आउटपुट भी AC ही होगा।


Step up transformer

इस प्रकार के ट्रांसफार्मर के द्वारा कम वोल्टेज को अधिक वोल्टेज में बदला जाता है| इसके प्राइमरी वाइंडिंग में टर्न की संख्या कम, और सेकेंडरी वाइंडिंग में टर्न की संख्या अधिक होती है। स्टेप अप ट्रांसफार्मर का उपयोग ज्यादातर पॉवर ट्रांसमिशन कंपनिया लाइन को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाने के लिए करती है|


Step down transformer

इस प्रकार के transformer के द्वारा अधिक वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदला जाता है|इसके primery winding में turn की संख्या अधिक और secondary winding में कम हैं।


ऑटो ट्रांसफार्मर (Auto Transformer)

इस प्रकार के transformer द्वारा वोल्टेज को स्टेप अप और स्टेप डाउन दोनों कार्य किये जाते है|
Auto transformer के अन्दर सिर्फ एक ही वाइंडिंग का उपयोग किया जाता है| इस वाइंडिंग से बहुत से कनेक्शन पॉइंट निकले जाते है|
इसके कनेक्शन पॉइंट में से एक पॉइंट common रखा जाता है| बाकि बचे हुए पॉइंट में इनपुट और आउटपुट के कनेक्शन किये जाते है| सर्किट के लोड के हिसाब से कॉमन primery और secondary का चुनाव किया जाता है| इसका use स्टेबलाइजर और यूपीएस में किया जाता है।


ट्रांसफार्मर की संरचना


वैसे तो ट्रांसफार्मर कई प्रकार पार्ट से मिलकर बना होता है| कुछ प्रमुख पार्ट के बारे में जानेंगे|
Primary Winding
ट्रांसफार्मर के Primary Winding में ही इनपुट सप्लाई दी जाती है| और इसी में फ्लक्स भी उत्पन्न होते है|
Core
primary winding में उत्पन्न हुई magnetic flux को इसके द्वारा सेकेंडरी वाइंडिंग में पास किया जाता है| यह एक closed magnetic circuit बनाता है|
Secondary Winding
secondary Winding भी उसी कोर में लिपटी रहती है जिस कोर में प्रिमेरी वाइंडिंग लिपटी होती है| इसमें इंडक्शन के जरिये EMF पैदा होता है| किसी ट्रांसफार्मर का आउटपुट वोल्टेज सेकेंडरी वाइंडिंग के टर्न की संख्या पर depend करता है|


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